Store House of Data on the Internet

इंटरनेट पर डेटा का स्टोर हाउस

Cloud Computing

माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में एक स्टार्टअप ख़रीदकर अपनी क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक को और सुरक्षित किया है | आईये जानते है क्या है यह तकनीक?

क्लाउड कंप्यूटिंग का मतलब डेटा और प्रोग्राम्स को अपने कंप्यूटर की हार्ड ड्राइव के बजाय इंटरनेट पर स्टोर या एक्सेस करना है | यह डेटा अनेक फिजिकल तथा वर्चुअल सर्वर्स पर स्टोर रहता है, इसी स्टोर हाउस को क्लाउड कहते है | इस क्लाउड की कोई एक लोकेशन तय नहीं है | यह किसी कंपनी के डेटा सेंटर में भी हो सकता है या फिर थर्ड पार्टी के डेटा सेंटर में |

जैसे इ-मेल और फेसबुक

हमारे इ-मेल पर आया या हमारे द्वारा भेजा गया मेल, फेसबुक पर डाला गया कंटेंट और ब्लॉग सबकुछ क्लाउड पर ही स्टोर रहता है | गूगल ड्राइव या ड्राप बॉक्स भी इसी कंप्यूटिंग के उदहारण है |

इस तरह काम करती है तकनीक

१. कंप्यूटर, टेबलेट या स्मार्टफोन में फाइल या डॉक्यूमेंट सेव करने की जगह को हम मेमोरी कहते है | मगर इ-मेल या सोइल नेटवर्किंग साइट्स पर अपलोड चीज़े इस मेमोरी में स्टोर नहीं होती | ये क्लाउड यानी डिजिटल मेमोरी में जाती है |

२. इस क्लाउड के अंदर ढेरों सर्वर मौजूद होते है, जो आपस में एक दूसरे से जुड़े रहते है | इस सर्वर से औरों का डेटा भी इस क्लाउड में स्टोर और अपडेट होता रहता है |

३. अब हम अपना और दूसरों द्वारा सार्वजनिक डेटा इंटरनेट पर देख सकते है | दरअसल, जब हम इंटरनेट पर कुछ सर्च करते है, तो क्लाउड में सेव इस डेटा को ही खंगाल रहे होते है |

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