Why Garba is Played During Navratri ?

नवरात्रि में ही क्यों खेला जाता है गरबा

नवरात्रि में हर तरफ गरबा की धूम दिखाई देती है। खूबसूरत और पारंपरिक अंदाज में सजे लोग इस नृत्य को मस्ती में झूमते हुए करते हैं। आखिर गरबा नवरात्रि के वक्त क्यों होता है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्रि के नौ दिन मौसम बहुत संतुलित रहता है। इन दिनों में न ज्यादा गर्मी, न बरसात और न ठंड होती हैं। ऐसा मौसम नृत्य और आनंद के लिए अनुकूल होता है। इस कारण देवी मां और गरबा के बहाने लोग नृत्य का मजा लेते हैं। गरबा संस्कृत के शब्द गर्भ से निकला है। नवरात्रि में यह पूरा नृत्य मिट्टी से बने एक गर्भ के चारों ओर किया जाता हैं। इस गर्भ का अर्थ असल में संसार के मूल यानी प्रसव, जन्म या उत्पति से है। मैदान में रखे जाने वाले इस गर्भ के अंदर माता के नाम का एक दीप भी रखा जाता है, जिसे गर्भ दीप भी कहा जाता हैं। गरबा में सभी लोग माता के गर्भ के चारो-ओर घूमते हैं। इस बात को प्रतीकात्मक रूप में यह कहा जाता है कि इस संसार की उत्पति, हम सब की उत्पति, इस गर्भ से ही हुई है। जिस तरह से हमारा जीवन मां अम्बे के चारों ओर घूमता है, उसी तरह गरबे का यह खेल भी हमारे जीवनचक्र का एक प्रतीक है, जो निरंतर चलता रहता है कभी रुकता नहीं है। इस जीवन की धुरी, इसका पूरा केंद्र मां के नाम का वह गर्भ होता है।

Article Courtesy: DB Star

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